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सन 1947 में कोनसी चीज़े कितनी महंगी थी जानिए

जैसा की आप जानते है और बचपन स्वे सुनते आ रहे है की हमारा भारत देश सोने की चिड़िया कहलाता था, मगर विदेशी हुकूमत को ये गवारा न हुआ और हमारे देश में समय समय पर आक्रमण होते रहे और हमारा सारा खज़ाना विदेशी लूट के अपने देश ले गए,आखिर में आने वाली ब्रिटिश कंपनी ने पुरे भारत में खूब लूट मचाई और बचा कुछ जो भी खजाना था सोना चाँदी हिरे जवाहरात अपने देश ले गए और भारत में भारत की जनता पर ज़ुल्म करते रहे,सम्पूर्ण भारत में अंग्रेजो के खिलाफ आंदोलन चलने लगे भारतीय इन के जुल्मो सितम से बहुत परेशान हो चुके थे,अब भारतीय आज़ाद होने के सपने बुनने लग गया था हर भारतीय ने इस सपने को साकार करने के लिए अपने खून पसीना एक कर दिया था

आज़ादी की इस लड़ाई में भारत के कई सपूत हुवे जिन्होंने अपनी जान की बलि चढ़ा दी भारत की आज़ादी के खातिर,इसमें भगत सिंह,चंद्र शेखर आज़ाद,अशफाक उल्ला खान,सुखदेव सिंह,लाला लाजपत राय,विपिन चन्दर बॉस,बाल गंगाधर तिलक,सुभाष चंद्र बॉस, इन्होने अपनी जान लगा दी आज़ादी के खातिर,इन सभी को हमारा भारतीय इतिहास कभी भुला नहीं सकता इन सभी का नाम भारत के हर बच्चे और बूढ़ो को पता है और पता होना भी चाहिए ये भारत के वीर सपूत है जिनके कारण हमें आज़ादी मिली,आज़ादी के बाद भारत की आर्थिक अर्थव्य्वस्था काफी काफी ख़राब थी जिसके चलते समूचे भारत में महंगाई 10 से 20 प्रतिशत बढ़ गयी

भारत में अंग्रेज अपने सुख सुविधा के सरे साजो सामान ले कर जाने लगे जिससे की यहाँ पर असुविधा होने लगी और सामानो की कमी से उन की कीमतों में उछाल आया और वस्तुवे महंगी होने लगी आज हमारे देश को आज़ाद हुवे 70 साल हो चुके है यहाँ काफी कुछ बदल सा गया है और पीछे बहुत कुछ छूट भी गया गया. आज हम आप को आज़ादी के बाद बाज़ारो की कीमतों से वाकिफ करवाते है उस वक़्त चीज़ो के भाव क्या क्या थे

आज़ाद भारत में यह थी कीमतें

आज़ादी के समय में वाहनों का इतना ज्यादा चलन नहीं था इसलिए मुंबई में विक्टोरिया नाम से चलित घोडा गाड़ी चला करती थी इसमें प्रति व्यक्ति 1 .5 किलो मीटर का हिसाब से 1 आना देना होता था,भारत में बासमती चावल 65 पैसे प्रति किलो के हिसाब से,चीनी 40 पैसे,गेंहू 40 पैसे के हिसाब से मिला करते थे.

उस वक़्त मुंबई से अहमदाबाद की हवाई यात्रा 18 रूपये में होती थी,तेलानीरामा की किताबे 1 .5 रूपये और सिनेमा की टिकिट 40 पैसे से 8 आने में मिल जाती थी,आज़ादी के वक़्त भारतीयों की मासिक आय महज 150 हुआ करती थी जिसमे उन का जीवन यापन आसानी से ही जाता था,अगर हम आज के समय से आज़ादी के समय की तुलना करे तो आज हर तीसरा व्यक्ति हजारो रूपये कमा रहा है परन्तु बड़ी मुश्किल से घर को चला प् रहा है और अपना जीवन यापन कर रहा है,आय के बढ़ें के साथ साथ कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है जिससे उस समय की इस समय से तुलना करना व्यर्थ है

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